Friday, 30 July 2021

आरती : (लक्ष्मी माता)

 



ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता , तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत 

हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता - २ 

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता - 2 , सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता 

ॐ जय लक्ष्मी माता x २ 

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता - 2 , जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता 

ॐ जय लक्ष्मी माता x २ 

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता - 2 , कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता 

ॐ जय लक्ष्मी माता x २ 

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता - 2 , सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता 

ॐ जय लक्ष्मी माता x २ 

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता - 2 , खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता 

ॐ जय लक्ष्मी माता x २ 

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता - 2 रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता x २

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता - 2 ,  उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता 

ॐ जय लक्ष्मी माता x २ 

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता तुमको निशदिन सेवत, मैया जी को निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता, ॐ जय लक्ष्मी माता x २

Shri Laxmi Mata Aarti

श्री हनुमान चालीसा

 


श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारी , बरनौ रघुबर बिमल जसु, जो दायकू फल चारि
बुध्दि हीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार , बल बुध्दि विद्या देहु मोंही , हरहु कलेश विकार ||

...ॐ... चोपाई ...ॐ...

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर , जय कपीस तिहुं लोक उजागर 
|

राम दूत अतुलित बल धामा , अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी , कुमति निवार सुमति के संगी 

कंचन बरन बिराज सुबेसा , कानन कुण्डल कुंचित केसा ||

हाथ वज्र औ ध्वजा विराजे , काँधे मूंज जनेऊ साजे 
|

संकर सुवन केसरी नंदन , तेज प्रताप महा जग बंदन ||

विद्यावान गुनी अति चातुर , राम काज करिबे को आतुर |

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया , राम लखन सीता मन बसिया ||

सुषम रूप धरी सियहि दिखावा , बिकट रूप धरी लंक जरावा |

भीम रूप धरी असुर संहारे , रामचंद्र के काज संवारे ||

लाय संजीवन लखन जियाये , श्रीरघुवीर हरषि उर लाये |

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई , तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ||

सहस बदन तुम्हरो जस गावे , अस कही श्रीपति कंड लगावे |

सनकादिक ब्रह्मादी मुनीसा , नारद सारद सहित अहीसा ||

जम कुबेर दिगपाल जहा ते , कबि कोबिद कही सके कहा ते |

तुम उपकार सुग्रीवहीं कीन्हा , राम मिलाय रज पद दीन्हा ||

तुम्हरो मंत्र विभेक्षण माना , लंकेश्वर भए सब जग जाना |

जुग सहस्र योजन पर भानू , लील्यो ताहि मधुर फल जाणू ||

प्रभु मुद्रिका मेली मुख माहीं , जलधि लांघी गए अचरज नाहीं |

दुर्गम काज जगत के जेते , सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||

राम दुआरे तुम रखवारे , होत न आग्यां बिनु पैसारे |

सब सुख लहै तुम्हारी सरना , तुम रक्षक काहू को डरना ||

आपण तेज सम्हारो आपे , तीनों लोक हांक ते काँपे |

भुत पिसाच निकट नहिं आवो , महावीर जब नाम सुनावे ||

नासौ रोग हरे सब पीरा , जपत निरंतर हनुमत बीरा |

संकट से हनुमान छुडावे , मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ||

सब पर राम तपस्वी राजा , तिन के काज सकल तुम साजा |

और मनोरथ जो कोई लावे , सोई अमित जीवन फल पावे ||

चारों जुग प्रताप तुम्हारा , है प्रसिद्ध जगत उजियारा |

साधु संत के तुम रखवारे , असुर निकंदन राम दुलारे ||

अष्ट सिद्धि नौनिधि के दाता , अस बर दीन जानकी माता |

राम रसायन तुम्हरे पासा , सदा रहो रघुपति के दासा ||

तुम्हरे भजन राम को पावे , जनम जनम के दुःख बिस्रावे |

अंत काल रघुबर पुर जाई , जहा जनम हरी भक्त कहाई ||

और देवता चित्त न धरई , हनुमत सेई सर्व सुख करई |

संकट कटे मिटे सब पीरा , जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ||

जय जय जय हनुमान गोसाई , कृपा करहु गुरु देव के नाइ |

जो सत बार पाट कर कोई , छूटही बंदी महा सुख होई ||

जो यहे पड़े हनुमान चालीसा , होय सिद्धि साखी गौरीसा |

तुलसीदास सदा हरी चेरा , कीजै नाथ हृदये मह डेरा ||

ॐ.. दोहा.. ॐ..
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूर्ति रूप |
राम लखन सीता सहित , ह्रुदय बसहु सुर भूप ||
ॐ.. ॐ.. ॐ..

Shri Hanuman Chalisa

आरती : (हनुमान जी की)

 


आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की 

जाके बल से गिरिवर कांपे , रोग दोष जाके निकट न झांके 

अंजनि पुत्र महा बलदाई , सन्तन के प्रभु सदा सहाई 

आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

दे बीरा रघुनाथ पठाए , लंका जायी सिया सुधि लाए

लंका सो कोट समुद्र सीखाई , जात पवनसुत बार न लाई 

आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

लंका जारि असुर संहारे , सियारामजी के काज सवारे 

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे , आनि संजीवन प्राण उबारे 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

पैठि पाताल तोरि जम कारे , अहिरावण की भुजा उखारे 

बाएं भुजा असुरदल मारे , दाहिने भुजा संत जन तारे 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

 सुर नर मुनि आरती उतारें , जय जय जय हनुमान उचारें

कंचन थार कपूर लौ छाई , आरती करत अंजनी माई 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

जो हनुमानजी की आरती गावे , बसि बैकुण्ठ परम पद पावे 

लंक बिध्वंश किन्ही रघुराई , तुलसी दास  स्वामी आरती गाई 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 
 

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Thursday, 29 July 2021

आरती : (श्री रामचंद्र जी की)

               आरती  (श्री रामचंद्र जी की)


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन , हरण भाव भय दारुणम् 

नवकंज लोचन कंज मुखकर , कंज पद कन्जारुणम् 

कंदर्प अगणित अमित छवी , नव नील नीरज सुन्दरम् 

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि , नौमी जनक सुतावरम् 

भजु दीन बंधु दिनेश दानव , दैत्य वंश निकंदनम् 

रघुनंद आनंद कंद कौशल , चंद दशरथ नन्दनम् 

सिर मुकुट कुण्डल तिलक , चारु उदारू अंग विभूषणं 

आजानु भुज शर चाप धर , संग्राम जित खर-धूषणं 

इति वदति तुलसीदास शंकर , शेष मुनि मन रंजनम् 

मम ह्रदय कुंज निवास कुरु , कामादी खल दल गंजनम् 

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो , बरु सहज सुंदर सावरों


करुना निधान सुजान सिलू , सनेहू जानत रावरो 

एही भांती गौरी असीस सुनी , सिय सहित हिय हरषी अली 

तुलसी भवानी: पूजि पूनी पूनी , मुदित मन मंदिर चली 

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय , हरषु न जाइ कहि 

मंजुल मंगल मूल वाम , अंग फरकन लगे

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                                             Shirdi me jo ayega apad dur bhagayega





                                Main tumhi se Sai baba mai tum hi ko mang lunga





                                                Satguru Mai Teri Patang



Hari Hari Jap Le, Ram nam Jap Le



आरती : (सत्यनारायण जी की)

      आरती सत्यनारायण जी की             


जय लक्ष्मी रमणा स्वामी श्री लक्ष्मी रमणा , सत्यनारायण स्वामी सत्यनारायण स्वामी 

जन पातक हरणा , ॐ जय लक्ष्मी रमणा  II 

रतन जड़ित सिंहासन अदभुत छवि राजे , स्वामी अदभुत छवि राजे 

नारद करत नीराजन , नारद करत नीराजन घंटा वन बाजे, ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

प्रकट भए कलिकारण द्विज को दरस दियो , स्वामी द्विज को दरस दियो 

बूढ़ा ब्राह्मण बनकर- बूढ़ा ब्राह्मण बनकर , कंचन महल कियो ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

दुर्बल भील कुठारी जिन पर कृपा करी , स्वामी जिन पर कृपा करी 

चंद्रचूड़ एक राजा चंद्रचूड़ एक राजा , तिनकी विपत्ति हरि ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीन्ही , स्वामी श्रद्धा तज दीन्ही सो फल भाग्यो प्रभुजी 

सो फल भाग्यो प्रभुजी , फिर अस्तुति किन्ही ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धरयो , स्वामी छिन-छिन रूप धरयो 

श्रद्धा धारण किनी श्रद्धा धारण किनी , तिनके काज सरयो ॐ जय लक्ष्मी रमणा II


चढत प्रसाद सवायो कदली फल मेवा , स्वामी कदली फल मेवा 

धूप-दीप-तुलसी से धूप-दीप-तुलसी से , राजी सत्यदेवा ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावै , स्वामी जो कोई नर गावै 

तन मन सुख संपती तन मन सुख संपती , मनवांछित फल पावे ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

जय लक्ष्मी रमणा स्वामी श्री लक्ष्मी रमणा , सत्यनारायण स्वामी सत्यनारायण स्वामी 

जन पातक हरणा ॐ जय लक्ष्मी रमणा ॐ जय लक्ष्मी रमणा ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

Shri Satyanarayan Ji Aarti

आरती : ॐ जय शिव ओंकारा

Om Jai Shiv Onkara              आरती  ॐ जय शिव ओंकारा 



ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा, 
विष्णु, सदाशिव ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा 
ॐ जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा 
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओंकारा 

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे स्वामी पञ्चानन राजे 
हंसासन गरूड़ासन
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॐ जय शिव ओंकारा 

दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज ते सोहे स्वामी दसभुज ते सोहे 
तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता त्रिभुवन मन मोहे 
ॐ जय शिव ओंकारा 

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी स्वामी मुण्डमाला धारी 
चन्दन मृगमद चंदा चन्दन मृगमद चंदा भोले शुभ कारी 
ॐ जय शिव ओंकारा


श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे स्वामी बाघाम्बर अंगे 
ब्रह्मादिक संतादिक ब्रह्मादिक संतादिक भूतादिक संगे 
ॐ जय शिव ओंकारा 

कर मध्ये च’कमण्ड चक्र त्रिशूलधरता स्वामी चक्र त्रिशूलधरता 
जग कर्ता जग हरता जग कर्ता जग हरता जगपालन करता 
ॐ जय शिव ओंकारा 

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका 
प्रनाबाच्क्षर के मध्ये प्रनाबाच्क्षर के मध्ये ये तीनों एका 
ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ जन गावे स्वामी जो कोइ जन गावे 
कहत शिवानन्द स्वामी कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे 
ॐ जय शिव ओंकारा 
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव 
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओंकारा 
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओंकारा





Wednesday, 28 July 2021

आरती : (श्री गणेश आरती)









 जय गणेश जय गणेश , जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती , पिता महादेवा

 एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी , माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी 

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा , लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

अँधे को आँख देत कोढ़िन को काया , बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया 

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा ,  माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा..


Shri Ganesh Aarti



आरती : (ॐ जय जगदीश हरे)

                                                            ॐ जय जगदीश हरे 

ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे 

भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट क्षण में दूर करे 

ॐ जय जगदीश हरे ......

जो ध्यावे फल पावे , दुःखबिन से मन का 

स्वामी दुःखबिन से मन का 

सुख सम्पति घर आवे , सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का


ॐ जय जगदीश हरे ........

मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी , स्वामी शरण गहूं मैं किसकी 
तुम बिन और न दूजा , तुम बिन और न दूजा आस करूं मैं जिसकी 
ॐ जय जगदीश हरे ........

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी , स्वामी तुम अन्तर्यामी 
पारब्रह्म परमेश्वर , पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी 
ॐ जय जगदीश हरे .........

तुम करुणा के सागर , तुम पालनकर्ता स्वामी तुम पालनकर्ता 
मैं मूरख फलकामी , मैं सेवक तुम स्वामी कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे ......

तुम हो एक अगोचर , सबके प्राणपति स्वामी सबके प्राणपति 
किस विधि मिलूं दयामय , किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति 
ॐ जय जगदीश हरे ........

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता ठाकुर तुम मेरे , स्वामी रक्षक तुम मेरे 
अपने हाथ उठाओ , अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे 
ॐ जय जगदीश हरे .......

विषय-विकार मिटाओ , पाप हरो देवा स्वमी पाप हरो देवा
 श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ , श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा 
ॐ जय जगदीश हरे ...ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे 
भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट क्षण में दूर करे 
ॐ जय जगदीश हरे........ॐ जय जगदीश हरे


साईं भजन (औक़ात विच रखी साइयाँ)


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 भजन सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पे क्लिक करें 

साईं भजन (सत्गुरु मै तेरी पतंग )


Satguru Main Teri Patang Lyrics In Hindi


सतगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग

हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी

बाबा डोर हथों छड़ी न मैं कटी जावांगी
सतगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग

बड़ी मुश्किल दे नल मिलिया मैनू तेरा दवारा है , बाबा तेरा दवारा है
मैनू इको तेरा आसरा नाल तेरा सहारा है , बाबा तेरा सहारा है
तेरे ही भरोसे बाबा तेरे ही भरोसे
हवा विच उडदी जावांगी
बाबा डोर हथों छड़ी न मैं कटी जावांगी

सतगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी

ऐना चरना कमला नालो मैनू दूर हटायीं न बाबा दूर हटायीं न
इस झूठे जग दे अंदर मेरा पेंचा लाइ न
जे कट गयीं ता सतगुरु
फिर मैं लुटती जावांगी
फिर मैं लुटती जावांगी

सतगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी

अज्ज मलेया बूहा आके मैं तेरे द्वार दा, बाबा तेरे दवार दा
फिर जनम मरन दे गेडे तो मैं बचती जावांगी
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी

सतगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग
हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी
बाबा डोर हथों छड़ी न मैं कटी जावांगी

सतगुरु मैं तेरी पतंग बाबा मैं तेरी पतंग

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Satguru mai teri patang  सत्गुरु मै तेरी पतंग 



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आरती : (साईं बाबा आरती)

                                                                    

                                                                      


आरती साईबाबा । सौख्यदातार जीवा।
चरणरजातली । द्यावा दासा विसावा, भक्ता विसावा ।। आ०।।ध्रु ०।।
जाळुनियां अनंग। स्वस्वरूपी राहेदंग ।
मुमुक्षूजनां दावी । निज डोळा श्रीरंग ।। आ०।। १ ।।
जयामनी जैसा भाव । तया तैसा अनुभव ।
दाविसी दयाघना । ऐसी तुझीही माव ।। आ०।। २ ।।
तुमचे नाम ध्याता । हरे संस्कृती व्यथा ।
अगाध तव करणी । मार्ग दाविसी अनाथा ।। आ०।। ३ ।।
कलियुगी अवतार । सगुण परब्रह्मः साचार ।
अवतीर्ण झालासे । स्वामी दत्त दिगंबर ।। द०।। आ०।। ४ ।।
आठा दिवसा गुरुवारी । भक्त करिती वारी ।
प्रभुपद पहावया । भवभय निवारी ।। आ०।। ५ ।।
माझा निजद्रव्यठेवा । तव चरणरज सेवा ।
मागणे हेचि आता । तुम्हा देवाधिदेवा ।। आ०।। ६ ।।
इच्छित दिन चातक। निर्मल तोय निजसुख ।
पाजावे माधवा या । सांभाळ आपुली भाक ।। आ०।। ७ ।।

Sai Baba Aarti


                 ॐ जय जगदीश हरे 

ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे 

भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट क्षण में दूर करे 

ॐ जय जगदीश हरे ......

जो ध्यावे फल पावे , दुःखबिन से मन का 

स्वामी दुःखबिन से मन का 

सुख सम्पति घर आवे , सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का


ॐ जय जगदीश हरे ........


मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी , स्वामी शरण गहूं मैं किसकी 
तुम बिन और न दूजा , तुम बिन और न दूजा आस करूं मैं जिसकी 
ॐ जय जगदीश हरे ........

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी , स्वामी तुम अन्तर्यामी 
पारब्रह्म परमेश्वर , पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी 
ॐ जय जगदीश हरे .........

तुम करुणा के सागर , तुम पालनकर्ता स्वामी तुम पालनकर्ता 
मैं मूरख फलकामी , मैं सेवक तुम स्वामी कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे ......

तुम हो एक अगोचर , सबके प्राणपति स्वामी सबके प्राणपति 
किस विधि मिलूं दयामय , किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति 
ॐ जय जगदीश हरे ........

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता ठाकुर तुम मेरे , स्वामी रक्षक तुम मेरे 
अपने हाथ उठाओ , अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे 
ॐ जय जगदीश हरे .......

विषय-विकार मिटाओ , पाप हरो देवा स्वमी पाप हरो देवा
 श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ , श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा 
ॐ जय जगदीश हरे ...ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे 
भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट क्षण में दूर करे 
ॐ जय जगदीश हरे........ॐ जय जगदीश हरे




                                                              (श्री गणेश आरती)


 जय गणेश जय गणेश , जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती , पिता महादेवा

 एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी , माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी 

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा , लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

अँधे को आँख देत कोढ़िन को काया , बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया 

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा ,  माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा..

Shri Ganesh Aarti



Om Jai Shiv Onkara              आरती  ॐ जय शिव ओंकारा 



ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा, 
विष्णु, सदाशिव ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा 
ॐ जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा 
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओंकारा 

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे स्वामी पञ्चानन राजे 
हंसासन गरूड़ासन
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॐ जय शिव ओंकारा 

दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज ते सोहे स्वामी दसभुज ते सोहे 
तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता त्रिभुवन मन मोहे 
ॐ जय शिव ओंकारा 

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी स्वामी मुण्डमाला धारी 
चन्दन मृगमद चंदा चन्दन मृगमद चंदा भोले शुभ कारी 
ॐ जय शिव ओंकारा


श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे स्वामी बाघाम्बर अंगे 
ब्रह्मादिक संतादिक ब्रह्मादिक संतादिक भूतादिक संगे 
ॐ जय शिव ओंकारा 

कर मध्ये च’कमण्ड चक्र त्रिशूलधरता स्वामी चक्र त्रिशूलधरता 
जग कर्ता जग हरता जग कर्ता जग हरता जगपालन करता 
ॐ जय शिव ओंकारा 

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका 
प्रनाबाच्क्षर के मध्ये प्रनाबाच्क्षर के मध्ये ये तीनों एका 
ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ जन गावे स्वामी जो कोइ जन गावे 
कहत शिवानन्द स्वामी कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे 
ॐ जय शिव ओंकारा 
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव 
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओंकारा 
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॐ जय शिव ओंकारा


                                                       आरती सत्यनारायण जी की             



जय लक्ष्मी रमणा स्वामी श्री लक्ष्मी रमणा , सत्यनारायण स्वामी सत्यनारायण स्वामी 

जन पातक हरणा , ॐ जय लक्ष्मी रमणा  II 

रतन जड़ित सिंहासन अदभुत छवि राजे , स्वामी अदभुत छवि राजे 

नारद करत नीराजन , नारद करत नीराजन घंटा वन बाजे, ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

प्रकट भए कलिकारण द्विज को दरस दियो , स्वामी द्विज को दरस दियो 

बूढ़ा ब्राह्मण बनकर- बूढ़ा ब्राह्मण बनकर , कंचन महल कियो ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

दुर्बल भील कुठारी जिन पर कृपा करी , स्वामी जिन पर कृपा करी 

चंद्रचूड़ एक राजा चंद्रचूड़ एक राजा , तिनकी विपत्ति हरि ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीन्ही , स्वामी श्रद्धा तज दीन्ही सो फल भाग्यो प्रभुजी 

सो फल भाग्यो प्रभुजी , फिर अस्तुति किन्ही ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धरयो , स्वामी छिन-छिन रूप धरयो 

श्रद्धा धारण किनी श्रद्धा धारण किनी , तिनके काज सरयो ॐ जय लक्ष्मी रमणा II


चढत प्रसाद सवायो कदली फल मेवा , स्वामी कदली फल मेवा 

धूप-दीप-तुलसी से धूप-दीप-तुलसी से , राजी सत्यदेवा ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावै , स्वामी जो कोई नर गावै 

तन मन सुख संपती तन मन सुख संपती , मनवांछित फल पावे ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

जय लक्ष्मी रमणा स्वामी श्री लक्ष्मी रमणा , सत्यनारायण स्वामी सत्यनारायण स्वामी 

जन पातक हरणा ॐ जय लक्ष्मी रमणा ॐ जय लक्ष्मी रमणा ॐ जय लक्ष्मी रमणा II

Shri Satyanarayan Ji Aarti


                                              आरती  (श्री रामचंद्र जी की)


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन , हरण भाव भय दारुणम् 

नवकंज लोचन कंज मुखकर , कंज पद कन्जारुणम् II

कंदर्प अगणित अमित छवी , नव नील नीरज सुन्दरम् 

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि , नौमी जनक सुतावरम्  II

भजु दीन बंधु दिनेश दानव , दैत्य वंश निकंदनम् 

रघुनंद आनंद कंद कौशल , चंद दशरथ नन्दनम् II

सिर मुकुट कुण्डल तिलक , चारु उदारू अंग विभूषणं 

आजानु भुज शर चाप धर , संग्राम जित खर-धूषणं II

इति वदति तुलसीदास शंकर , शेष मुनि मन रंजनम् 

मम ह्रदय कुंज निवास कुरु , कामादी खल दल गंजनम् II

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो , बरु सहज सुंदर सावरों


करुना निधान सुजान सिलू , सनेहू जानत रावरो II

एही भांती गौरी असीस सुनी , सिय सहित हिय हरषी अली 

तुलसी भवानी: पूजि पूनी पूनी , मुदित मन मंदिर चली II

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय , हरषु न जाइ कहि 

मंजुल मंगल मूल वाम , अंग फरकन लगे II

Aarti Shri RamChandra Bhagwan