Thursday, 29 July 2021

आरती : (श्री रामचंद्र जी की)

               आरती  (श्री रामचंद्र जी की)


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन , हरण भाव भय दारुणम् 

नवकंज लोचन कंज मुखकर , कंज पद कन्जारुणम् 

कंदर्प अगणित अमित छवी , नव नील नीरज सुन्दरम् 

पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि , नौमी जनक सुतावरम् 

भजु दीन बंधु दिनेश दानव , दैत्य वंश निकंदनम् 

रघुनंद आनंद कंद कौशल , चंद दशरथ नन्दनम् 

सिर मुकुट कुण्डल तिलक , चारु उदारू अंग विभूषणं 

आजानु भुज शर चाप धर , संग्राम जित खर-धूषणं 

इति वदति तुलसीदास शंकर , शेष मुनि मन रंजनम् 

मम ह्रदय कुंज निवास कुरु , कामादी खल दल गंजनम् 

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो , बरु सहज सुंदर सावरों


करुना निधान सुजान सिलू , सनेहू जानत रावरो 

एही भांती गौरी असीस सुनी , सिय सहित हिय हरषी अली 

तुलसी भवानी: पूजि पूनी पूनी , मुदित मन मंदिर चली 

जानि गौरी अनुकूल सिय हिय , हरषु न जाइ कहि 

मंजुल मंगल मूल वाम , अंग फरकन लगे

Aarti Shri RamChandra Bhagwan

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