Wednesday, 28 July 2021

आरती : (ॐ जय जगदीश हरे)

                                                            ॐ जय जगदीश हरे 

ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे 

भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट क्षण में दूर करे 

ॐ जय जगदीश हरे ......

जो ध्यावे फल पावे , दुःखबिन से मन का 

स्वामी दुःखबिन से मन का 

सुख सम्पति घर आवे , सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का


ॐ जय जगदीश हरे ........

मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी , स्वामी शरण गहूं मैं किसकी 
तुम बिन और न दूजा , तुम बिन और न दूजा आस करूं मैं जिसकी 
ॐ जय जगदीश हरे ........

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी , स्वामी तुम अन्तर्यामी 
पारब्रह्म परमेश्वर , पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी 
ॐ जय जगदीश हरे .........

तुम करुणा के सागर , तुम पालनकर्ता स्वामी तुम पालनकर्ता 
मैं मूरख फलकामी , मैं सेवक तुम स्वामी कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे ......

तुम हो एक अगोचर , सबके प्राणपति स्वामी सबके प्राणपति 
किस विधि मिलूं दयामय , किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति 
ॐ जय जगदीश हरे ........

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता ठाकुर तुम मेरे , स्वामी रक्षक तुम मेरे 
अपने हाथ उठाओ , अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे 
ॐ जय जगदीश हरे .......

विषय-विकार मिटाओ , पाप हरो देवा स्वमी पाप हरो देवा
 श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ , श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा 
ॐ जय जगदीश हरे ...ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे 
भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट क्षण में दूर करे 
ॐ जय जगदीश हरे........ॐ जय जगदीश हरे


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