Friday, 30 July 2021

आरती : (हनुमान जी की)

 


आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की 

जाके बल से गिरिवर कांपे , रोग दोष जाके निकट न झांके 

अंजनि पुत्र महा बलदाई , सन्तन के प्रभु सदा सहाई 

आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

दे बीरा रघुनाथ पठाए , लंका जायी सिया सुधि लाए

लंका सो कोट समुद्र सीखाई , जात पवनसुत बार न लाई 

आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

लंका जारि असुर संहारे , सियारामजी के काज सवारे 

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे , आनि संजीवन प्राण उबारे 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

पैठि पाताल तोरि जम कारे , अहिरावण की भुजा उखारे 

बाएं भुजा असुरदल मारे , दाहिने भुजा संत जन तारे 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

 सुर नर मुनि आरती उतारें , जय जय जय हनुमान उचारें

कंचन थार कपूर लौ छाई , आरती करत अंजनी माई 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

जो हनुमानजी की आरती गावे , बसि बैकुण्ठ परम पद पावे 

लंक बिध्वंश किन्ही रघुराई , तुलसी दास  स्वामी आरती गाई 

आरती कीजै हनुमान लला की , दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 

आरती कीजै हनुमान लला की दुष्ट दलन रघुनाथ कला की II 
 

Aarti Shri Hanuman Ji Ki

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